दैनिक हिंदू पंचांग व मुहूर्त
सूर्योदय और सूर्यास्त, दिन की तिथि, नक्षत्र, योग और करण, राहुकाल और चौघड़िया, जो हर दिन मंदिर के अपने स्थान के लिए गणना किए जाते हैं।
आश्विन कृष्ण दशमी
मास के नाम गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग (अमावस्या से अमावस्या) के अनुसार हैं।
- सूर्योदय6:59 am
- सूर्यास्त6:15 pm
- तिथिकृष्ण दशमी11:04 am तक, फिर एकादशी
- नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी3:30 am (अगले दिन) तक, फिर उत्तरा फाल्गुनी
- योगब्रह्म8:00 am तक, फिर इन्द्र
- करणविष्टि (भद्रा)11:04 am तक, फिर बव
- चंद्र राशिसिंह
- सूर्य राशितुला
आज के मुहूर्त
- शुभब्रह्म मुहूर्त5:17 am – 6:08 am
- शुभअभिजित मुहूर्तबुधवार को नहीं माना जाता
- नए कार्य के लिए वर्जितराहुकाल12:37 pm – 2:01 pm
- नए कार्य के लिए वर्जितयमगण्ड8:24 am – 9:48 am
- नए कार्य के लिए वर्जितगुलिक काल11:13 am – 12:37 pm
राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल में परंपरागत रूप से नया कार्य, यात्रा और ख़रीदारी आरंभ नहीं की जाती; दैनिक पूजा सामान्य रूप से चलती रहती है।
चौघड़िया
दिन और रात, दोनों को आठ-आठ चौघड़ियों में बाँटा जाता है। अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं, चर सामान्य है, और उद्वेग, काल व रोग में महत्वपूर्ण कार्य टाले जाते हैं।
| दिन का चौघड़िया | समय | स्वभाव |
|---|---|---|
| लाभ | 6:59 am – 8:24 am | शुभ |
| अमृत | 8:24 am – 9:48 am | शुभ |
| काल | 9:48 am – 11:13 am | अशुभ |
| शुभ | 11:13 am – 12:37 pm | शुभ |
| रोग | 12:37 pm – 2:01 pm | अशुभ |
| उद्वेग | 2:01 pm – 3:26 pm | अशुभ |
| चर | 3:26 pm – 4:50 pm | सामान्य |
| लाभ | 4:50 pm – 6:15 pm | शुभ |
| रात का चौघड़िया | समय | स्वभाव |
|---|---|---|
| उद्वेग | 6:15 pm – 7:51 pm | अशुभ |
| शुभ | 7:51 pm – 9:26 pm | शुभ |
| अमृत | 9:26 pm – 11:02 pm | शुभ |
| चर | 11:02 pm – 12:37 am | सामान्य |
| रोग | 12:37 am – 2:13 am | अशुभ |
| काल | 2:13 am – 3:48 am | अशुभ |
| लाभ | 3:48 am – 5:24 am | शुभ |
| उद्वेग | 5:24 am – 7:00 am | अशुभ |
अगले 30 दिनों के उत्सव
- 08 नव॰ 2026: दीपावली एवं लक्ष्मी पूजन
- 10 नव॰ 2026: अन्नकूट महोत्सव एवं नूतन वर्ष
मंदिर (22.24° उ., 68.97° पू.) के लिए भारतीय मानक समय में गणना। समय अनुमानित हैं (कुछ मिनटों के भीतर) और छपे हुए पंचांगों से थोड़ा भिन्न हो सकते हैं; संस्कारों और अनुष्ठानों के मुहूर्त के लिए कृपया मंदिर के पुजारियों से परामर्श करें।