मंदिर से आगे

आसपास के पवित्र तीर्थों की परिक्रमा

सौराष्ट्र का तट पवित्र स्थलों से भरा है: एक ज्योतिर्लिंग, द्वीप पर बने मंदिर, प्राचीन देवालय और महाभारत से जुड़े स्थान। इन्हें अपनी यात्रा में ऐसे शामिल करें।

तीर्थ और धरोहर स्थल

  • रुक्मिणी देवी मंदिर

    2 कि.मी. 10 मि. · सुबह 6:00 - रात 9:00

    देवी रुक्मिणी को समर्पित बारहवीं शताब्दी का मंदिर, जिसकी बाहरी दीवारों पर देवताओं, नर्तकियों और हाथियों की सुंदर नक्काशी है। मान्यता है कि ऋषि दुर्वासा के शाप के कारण यह नगर से अलग स्थित है।

    सुझाव: यहाँ जल-दान का टोकन लें; यह मंदिर जल-दान की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

  • नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

    17 कि.मी. 25 मि. · सुबह 6:00 - रात 9:00

    भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, जिसे शिव पुराण में सभी विषों से रक्षा करने वाला बताया गया है। यहाँ शिव की विशाल बैठी हुई प्रतिमा है।

    सुझाव: प्रातःकाल अभिषेक की अनुमति है; पुरुष धोती साथ रखें।

  • गोपी तालाब

    20 कि.मी. 30 मि. · सूर्योदय से सूर्यास्त

    वह पवित्र सरोवर जहाँ परंपरा के अनुसार वृंदावन की गोपियाँ श्रीकृष्ण से मिली थीं। इसकी कोमल पीली मिट्टी, गोपी चंदन, पूरे भारत में तिलक के लिए प्रयोग होती है।

  • बेट द्वारका

    30 कि.मी. ओखा और सुदर्शन सेतु होकर 50 मि. · सुबह 6:00 - दोपहर 1:00, शाम 5:00 - रात 9:00

    श्रीकृष्ण के निवास के रूप में पूजित द्वीप पर स्थित तीर्थ, जहाँ अब केबल-आधारित सुदर्शन सेतु से पहुँचा जाता है। द्वीप पर हनुमान दांडी मंदिर और सुंदर समुद्र तट भी हैं।

    सुझाव: दोपहर में मंदिर बंद रहता है; दोपहर से पहले पहुँचने की योजना बनाएँ।

  • शिवराजपुर समुद्र तट

    12 कि.मी. 20 मि. · सुबह 7:00 - शाम 7:00

    स्वच्छ जल और प्रकाश-स्तंभ वाला ब्लू फ़्लैग प्रमाणित समुद्र तट: दर्शनों के बीच विश्राम का शांत स्थान।

    सुझाव: केवल चिह्नित क्षेत्र में ही तैरें और जीवनरक्षकों के झंडों का पालन करें।

  • हरसिद्धि माता मंदिर, हर्षद

    60 कि.मी. 1 घं. 15 मि. · सुबह 5:30 - रात 9:00

    सौराष्ट्र के अनेक समुदायों की कुलदेवी का मंदिर, पोरबंदर जाने वाले तटीय मार्ग पर समुद्र के ऊपर कोयला पहाड़ी पर स्थित।

  • कीर्ति मंदिर व सुदामा मंदिर, पोरबंदर

    100 कि.मी. 2 घं. · सुबह 7:30 - शाम 7:00

    महात्मा गांधी का जन्मस्थान, जो स्मारक के रूप में संरक्षित है, और श्रीकृष्ण के बाल सखा सुदामा का दुर्लभ मंदिर, जिसकी भक्ति-भूलभुलैया प्रसिद्ध है।

  • सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

    235 कि.मी. 4 घं. 30 मि. · सुबह 6:00 - रात 10:00

    बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम, इतिहास में अनेक बार पुनर्निर्मित, अरब सागर के तट पर स्थित। संध्या का ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रम इसकी कथा सुनाता है।

    सुझाव: संध्या आरती और प्रातः दर्शन के लिए एक रात ठहरने की योजना बनाएँ।

सुझाई गई यात्रा योजनाएँ

एक दिन: स्थानीय परिक्रमा

आसपास के चार तीर्थों सहित मंदिर दर्शन; राज्य बसें और निजी संचालक यह परिक्रमा प्रतिदिन लगभग ₹200 प्रति व्यक्ति में कराते हैं।

  1. सुबह 5:30

    मंदिर में मंगला आरती और दर्शन

  2. सुबह 8:30

    रुक्मिणी देवी मंदिर, फिर नाश्ता

  3. सुबह 10:00

    नागेश्वर ज्योतिर्लिंग और गोपी तालाब

  4. दोपहर 12:00

    सुदर्शन सेतु होकर बेट द्वारका, द्वीप पर भोजन

  5. शाम 6:30

    संध्या आरती के लिए मंदिर में वापसी

दो दिन: सौराष्ट्र तट

पोरबंदर और सोमनाथ तक तटीय मार्ग जोड़ें, जिसका समापन प्रथम ज्योतिर्लिंग पर होता है।

  1. पहला दिन

    मंदिर और एक दिन की स्थानीय परिक्रमा; मंदिर के यात्री कक्षों में रात्रि विश्राम

  2. दूसरा दिन, सुबह 7:00

    तट के साथ यात्रा; हर्षद में हरसिद्धि माता पर पड़ाव

  3. दूसरा दिन, सुबह 11:00

    पोरबंदर में कीर्ति मंदिर और सुदामा मंदिर

  4. दूसरा दिन, शाम 5:00

    सोमनाथ: संध्या आरती और ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रम

दूरियाँ मंदिर से सड़क मार्ग की हैं और अनुमानित हैं। मार्ग और परिवहन के लिए कैसे पहुँचें देखें; रात्रि विश्राम के लिए यात्री कक्ष बुक करें।